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Monday, March 26, 2012

नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त


नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को ।

संभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को ।

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को ।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को ।........मैथिलीशरण गुप्त 

Saturday, February 28, 2009

tumhara naam

तुम्हारा नाम लिख लिख कर मिटाना भूल जाता हूँतुम्हे जब याद करता हूँ, भुलाना भूल जाता हूँ..,

बहुत सी ऐसी बातें हैं जो मेरे दिल में रहती हैं
मगर जब तुम से मिलता हूँ, सुनाना भूल जाता हूँ..,

तुम्हारे बाद अब हर पल बड़ी मुश्किल से कट ता है
मै अक्सर तुम को ख्वाबों में, बताना भूल जाता हूँ..,

मैं हर शाम कहता हूँ तुम को भूल जाऊँगा
मगर जब सुबह होती है, इरादा भूल जाता हूँ

Tuesday, January 27, 2009

मोहब्बत का इम्तिहान




मोहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं.

प्यार सिर्फ़ पाने का नाम नही.

मुद्दतें बीत जाती है किसी के इंतज़ार में.

यह सिर्फ़ एक पल दो पल का काम नहीं।

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आँसुओं में ढूँढना हमें,
दिल में हम बस जायेंगे!
तमन्ना हो अगर मिलने की,
तो बंद आंखों में नज़र आयेंगे!!
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ग़म नहीं वहां जहाँ हो फ़साना तेरा,
खुशिया ढूंढती आशियाना तेरा,
वो वक्त ही आए जब तू उदास हो,
ये दुनिया भुला सके मुस्कुराना तेरा..

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दरिया वफाओं का कभी रुकता नहीं,
मोहब्बत में इंसान कभी झुकता नहीं,
हम चुप है किसी की खुशी के लिए,
और वोह सोचते है दिल हमारा दुखता नहीं.

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कभी-कभी ऐसा भी होता है,
दोस्ती का असर ज़रा देर से होता है.
उन्हें लगता है हम कुछ नही सोचते उनके बारे में,
पर हर बात में ज़िक्र उनका ही होता है।

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Wednesday, January 7, 2009

roshni

हमको बताया था उन्होंने
हमको बताया था उन्होंने एक बार
की उनको सिर्फ़ उजाले ही भाते हैं
कहीं वो डर जायें अंधेरे में
इस लिए रौशनी के लिए हम दिल जलाते हैं
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तेरी उल्फत को
तेरी उल्फत को कभी नाकाम होने नही देंगे
तेरी चाहत को कभी बदनाम होने नही देंगे
मेरी जिंदगी में कभी सूरज निकले या निकले
पर तेरी जिंदगी में कभी शाम होने नही देंगे

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लबो पे आज
लबो पे आज उनका नाम गया,
प्यासे के हाथ में जैसे जाम गया,
डोले कदम तो गिरा उनकी बाहों में जाकर,
आज हमारा पीना ही हमारे काम गया
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हम होते
हम होते तो आप को ग़ज़ल कौन कहता,
आप के चेहरे को गुलाब कौन कहता,
ये तो करिश्मा है हम प्यार करने वालों का
वरना पत्थरों को ताज महल कौन कहता.

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तुम खफा
तुम खफा हो गए तो कोई खुशी रहेगी,
तेरे बिना चिरागों में रौशनी रहेगी;
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर,
जिंदा तो रहेंगे पर जिंदगी रहेगी.

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बड़ी आसानी से
बड़ी आसानी से दिल लगाये जाते हैं
पर बड़ी मुश्किल से वादे निभाए जाते हैं
ले जाती है मोहब्बत उन राहो पर
जहा दिए नही दिल जलाए जाते हैं
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सभी को
सभी को सब कुछ नही मिलता,
नदी की हर लहर को साहिल नही मिलता,
यह दिल वालों की दुनिया है दोस्त,
किसी से दिल नही मिलता तो कोई दिल से नही मिलता.
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दर्द
भुला कर हमें वो खुश रह पाएंगे?
साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे
दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द देना,
हम तो सह गए पर वोह टूट जायेंगे !
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प्यार
जब एक एक फूल को उड़ा ले गई हवा,
उस दिन बहार को मेरे घर का पता चला.
जब उठा ले चले हमें चार लोग,
उस दिन मेरे यार को मेरे प्यार का पता चला
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साए की तरह
साए की तरह साथ रहने वाले
हमसे रिश्ता तोड़ गए,
हकीकत में मिलना मुमकिन नही था
तो ख्वाबों में भी आना छोड़ गए
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पत्थर दिल
समंदर किनारे रेत पे नाम लिखते नही,
क्यों की रेत पे नाम कभी टिकते नही,
हमे भले ही आप पत्थर दिल समझो,
मगर पत्थर पे लिखे नाम कभी मिटते नही .
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बरसात
आशिक आँखों ही आँखों में बात समझ लेते हैं ,
सपनो में मिलने को मुलाकात समझ लेते हैं ,
रोता हैं अस्मा भी ज़मीन के लिए ,
पागल हैं लोग उसे बरसात समझ लेते हैं.
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आज हम है,
आज हम है, कल हमारी यादें होंगी,
जब हम होंगे, तब हमारी बातें होंगी,
कभी पलटोगे जिंदगी के येः पन्ने,
तो शायद आप की आंखों से बरसाते होंगी
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