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Monday, March 26, 2012

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त


हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है
पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है
हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ
खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहाँ
आता महाजन के यहाँ वह अन्न सारा अंत में
अधपेट खाकर फिर उन्हें है कांपना हेमंत में

बरसा रहा है रवि अनल, भूतल तवा सा जल रहा
है चल रहा सन सन पवन, तन से पसीना बह रहा
देखो कृषक शोषित, सुखाकर हल तथापि चला रहे
किस लोभ से इस आँच में, वे निज शरीर जला रहे

घनघोर वर्षा हो रही, है गगन गर्जन कर रहा
घर से निकलने को गरज कर, वज्र वर्जन कर रहा
तो भी कृषक मैदान में करते निरंतर काम हैं
किस लोभ से वे आज भी, लेते नहीं विश्राम हैं

बाहर निकलना मौत है, आधी अँधेरी रात है
है शीत कैसा पड़ रहा, औ’ थरथराता गात है
तो भी कृषक ईंधन जलाकर, खेत पर हैं जागते
यह लाभ कैसा है, न जिसका मोह अब भी त्यागते

सम्प्रति कहाँ क्या हो रहा है, कुछ न उनको ज्ञान है
है वायु कैसी चल रही, इसका न कुछ भी ध्यान है
मानो भुवन से भिन्न उनका, दूसरा ही लोक है
शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है

Wednesday, July 20, 2011

Chalo ik baar phir se ajnabii ban jaayein ham dono!


चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों 

न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूं दिल नवाजी की 
न तुम मेरी तरफ देखो ग़लत अंदाज़ नज़रों से 
न मेरे दिल की धरकन लडखडाये मेरी बातों में 
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से 

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों 

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेश कदमी से 
मुझे भी लोग कहते हैं के ये जलवे पराये हैं 
मेरे हमराह भी रुस्वाइयाँ हैं मेरे माजी की 
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साए हैं 

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों 

तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर 
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोडना अच्छा 
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन 
उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा 

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों 
Glossary:
पेश कदमी = making a move
माजी = past
ता'अर्रुफ़ = acquaintance (to know someone)
ताल्लुक  = relation (with someone)
अफसाना  = story
अंजाम = end, result


chalo ik baar phir se ajnabii ban jaayeiN ham donoN!

na maiN tum se koii ummeed rakhouN dil-navaazii kii
na tum meri taraf dekho Ghalat-andaaz nazroN se
na mere dil kii dhaRkan laRkhaRaaye merii baatoN meiN
na zaahir ho tumhaari kash-ma-kash kaa raaz nazroN se

tumheiN bhi koii uljhan roktii hai pesh-qadmii se
mujhe bhi log kahte haiN k ye jalve paraaye haiN
mere hamraah bhii rusvaaiyaaN haiN mere maazii kii
tumhaare saath bhii guzrii huii raatoN ke saaye haiN

ta’arruf rog ho jaaye to usko bhoolna behtar
ta’alluq bojh ban jaaye to usko toRna achchhaa
vo afsaanaa jise aNjaam tak laanaa na ho mumkin
use ik Khoobsoorat moR dekar chhoRnaa achchha

chalo ik baar phir se ajnabii ban jaayeiN ham donoN

Glossary:

pesh-qadmi = making a move
maazii = past
ta’arruf = acquaintance (to know someone)
ta’alluq = relation (with someone)
afsaanaa = story
anjaam = end, result

MP3 LINK : http://www.mediafire.com/file/tgt43onbmw80f9r/chalo%20ek%20baar%20phir%20se-mahendra%20kapoor-mf.mp3

Duniya

ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनिया
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

हर इक जिस्म घायल हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन दिलों में उदासी
ये दुनिया है या आलमे बदहवासी
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जहाँ इक खिलौना है इंसान की हस्ती
ये बस्ती है मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जवानी भटकती है बेज़ार बन कर
जवान जिस्म सजते हैं बाज़ार बन कर
तहां प्यार होता है व्योपार बन कर
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

ये दुनिया जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं दोस्ती कुछ नहीं है
जहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जला दो इसे फूंक डालो ये दुनिया
जला दो जला दो
जला दो इसे फूंक डालो ये दुनिया
मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है


ye mahloN, ye taKhtoN, ye taajoN ki duniya
ye insaaN ke dushman, samaajoN ki duniya
ye daulat ke bhuukhe, rivaajoN ki duniyaa
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

har ik jism ghaayal, har ik ruuh pyaasii
nigaahoN me uljhan, diloN meiN udaasi
ye duniyaa hai yaa aalam-e-badhavaasii
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

jahaaN ik khilona hai insaaN ki hastii
ye bastii hai murda-parastoN ki bastii
yahaaN par to jeevan se hai maut sastii
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

javaani bhaTaktii hai bezaar bankar
javaaN jism sajate haiN baazaar bankar
jahaaN pyaar hota hai vyopaar bankar
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

ye duniyaa jahaaN aadmi kuchh nahiiN hai
vafaa kuchh nahiiN, dostii kuchh nahiiN hai
jahaaN pyaar ki qadr hi kuchh nahiiN hai
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

jalaa do ise  phuuNk DaaloN ye duniyaa
jalaa do jalaa do
jalaa do ise phuuNk DaaloN ye duniyaa
mere saamne se haTaa lo ye duniyaa
tumhaari hai tum hi sambhaalo ye duniyaa
ye duniyaa agar mil bhi jaaye to kyaa hai

MP3 LINK : http://www.mediafire.com/?mrxm4mzddmn 

Sunday, April 10, 2011

सांस चलती है तुझे,चलना पड़ेगा ही मुसाफिर.



सांस चलती है तुझे,
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर.

चल रहा है तारकों का,
दल गगन में गीत गाता,
चल रहा आकाश भी है,
शुन्य में भ्रमता भ्रमाता,
पांव के नीचे पड़ी,
अचला नहीं ये चंचला है,
एक कण भी, एक क्षण भी,
एक थल पर टिक न पाता.

शक्तियां गति की तुझे,
सब ओर से घेरे हुए हैं,
स्थान से अपने तुझे,
टलना पड़ेगा ही मुसाफिर,
सांस चलती है तुझे,
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर.

थी जहाँ पर गर्त, पैरों,
को जमाना ही पड़ा था,
पत्थरों से पांव के,
छाले छिलाना ही पड़ा था,
घास मखमल सी जहाँ थी,
मन गया था लोट सहसा,
थी घनी छाया जहाँ पर,
तन जुड़ाना ही पड़ा था.

पग परीक्षा, पग प्रलोभन,
जोर कमजोरी भरा तू,
इस तरफ दतना, उधर,
ढलना पड़ेगा ही मुसाफिर,
सांस चलती है तुझे,
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर.

सूर्य ने हँसना भुलाया,
चन्द्रमा ने मुस्कुराना,
और भूली यामिनी भी,
तारिकाओं को जगाना,
एक झोंके ने बुझाया,
हाथ का भी दीप लेकिन,
मत बना इसको पथिक तू,
बैठ जाने का बहाना.

एक कोने में ह्रदय के,
आग तेरे जल रही है,
देखने को जग तुझे,
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर,
सांस चलती है तुझे,
चलना पड़ेगा ही मुसाफिर.





Agnipath


वृक्ष हो भले खड़े,
हो घने, हो बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.

तू न थकेगा कभी,
तू न थमेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रू, स्वेद, रक्त से,
लथपथ, लथपथ,लथपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.



Saturday, February 28, 2009

mera apna koi



रोना
भी जो चाहें तो वोः रोने नही देता
वो शख्स तो पलकें भी भिगोने नही देता...

वोह रोज़ रुलाता है हमें ख़्वाबों में आकर
सोना भी जो चाहें तो वोः सोने नही देता.....

यह किस के इशारे पे उमड़ आए हैं बादल
है कौन जो बारिश कभी होने नही देता...

आता है ख्यालों में मेरे कौन ये अक्सर
जो मुझ को किसी और का होने नही देता....

मैं हूँ की बहाता हूँ तेरी याद में आंसू
और तू है की अश्कों को पिरोने नही देता....

वोः चेहरा अजब है जिसे पाकर मैं अभी तक
खोना भी जो चाहूं तो वोः खोने नही देता...

Friday, February 27, 2009

TERI RAZA PAI HAI



तेरी
रज़ा पाई है

कोई खुशबू लेकर येः हवा आई है,

दिल में तेरी यादों की सदा आई है,

येः तेरा नज़रें झुका कर मुस्कुराना,

खुदा जाने कहाँ से यह अदा पाई है,

क्यों कुरबान हो जायें हम तुझ पर,

प्यार में मुश्किल से तेरी रज़ा पाई है।

TERI RAZA PAI HAI.

KOI KHUSHBOO LEKAR YEH HAWA AAYI HAI,

DIL MEIN TERI YAADON KI SADA AAYI HAI,

YEH TERA NAZREIN JHUKA KAR MUSKURANA,

KHUDA JANE KAHAN SE YEH ADA PAYI HAI,

KYON NA QURBAN HO JAYEIN HUM TUJH PAR,

PYAR MEIN MUSHKIL SE TERI RAZA PAI HAI.