Collection of beautiful and heart touching poetry and shayari which will touch the inner depths of your heart and soul.................for all the lovers of the world.......
Monday, March 26, 2012
असन्तोष / मैथिलीशरण गुप्त
बन्धन / मैथिलीशरण गुप्त
रमा है सबमें राम / मैथिलीशरण गुप्त
बाल-बोध / मैथिलीशरण गुप्त
नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त
Sunday, April 10, 2011
Agnipath

KAASH

DIL-E JAZBAT

Kismat

Bahut udas hai koi

Waqt Nahin

Thursday, March 17, 2011
Purva Chalne Ke Batohi Baat Ki Pehchaan Kar Le

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।
पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी
अनगिनत राही गए इस राह से उनका पता क्या पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी
यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है खोल इसका अर्थ पंथी पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।
यह बुरा है या कि अच्छा व्यर्थ दिन इस पर बिताना अब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना
तू इसे अच्छा समझ यात्रा सरल इससे बनेगी सोच मत केवल तुझे ही यह पड़ा मन में बिठाना
हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है तू इसी पर आज अपने चित्त का अवधान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।
है अनिश्चित किस जगह पर सरित गिरि गह्वर मिलेंगे है अनिश्चित किस जगह पर बाग वन सुंदर मिलेंगे
किस जगह यात्रा खतम हो जाएगी यह भी अनिश्चित है अनिश्चित कब सुमन कब कंटकों के शर मिलेंगे
कौन सहसा छू जाएँगे मिलेंगे कौन सहसा आ पड़े कुछ भी रुकेगा तू न ऐसी आन कर ले।
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।
A Great Poem by Dr. Harivansh Rai ji Bachchan
Wednesday, January 7, 2009
roshni

















