Showing posts with label hindi. Show all posts
Showing posts with label hindi. Show all posts

Monday, March 26, 2012

असन्तोष / मैथिलीशरण गुप्त



नहीं, मुझे सन्तोष नहीं।
मिथ्या मेरा घोष नहीं।
वह देता जाता है ज्यों ज्यों,
लोभ वृद्धि पाता है त्यों त्यों,
नहीं वृत्ति-घातक मैं,
उस घन का चातक मैं,
जिसमें रस है रोष नहीं।
नहीं, मुझे सन्तोष नहीं।
पाकर वैसा देने वाला—
शान्त रहे क्या लेने वाला ?
मेरा मन न रुकेगा,
उसका मन न चुकेगा,
क्या वह अक्षय-कोष नहीं ?
नहीं, मुझे सन्तोष नहीं।

माँगू क्यों न उसी को अब,
एक साथ पाजाऊँ सब,
पूरा दानी जब हो
कोर-कसर क्यों तब हो ?
मेरा कोई दोष नहीं।
नहीं, मुझे सन्तोष नहीं।

बन्धन / मैथिलीशरण गुप्त



सखे, मेरे बन्धन मत खोल,
आप बँधा हूँ आप खुलूँ मैं,
तू न बीच में बोल।

जूझूँगा, जीवन अनन्त है,
साक्षी बन कर देख,
और खींचता जा तू मेरे
जन्म-कर्म की रेख।

सिद्धि का है साधन ही मोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।

खोले-मूँदे प्रकृति पलक निज,
फिर एक दिन फिर रात,
परमपुरुष, तू परख हमारे
घात और प्रतिघात।
उन्हें निज दृष्टि-तुला पर तोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।

कोटि कोटि तर्कों के भीतर
पैठी तैरी युक्ति,
कोटि-कोटि बन्धन-परिवेष्टित
बैठी मेरी मुक्ति,
भुक्ति से भिन्न, अकम्प, अडोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।

खींचे भुक्ति पटान्त पकड़ कर
मुक्ति करे संकेत,
इधर उधर आऊँ जाऊँ मैं
पर हूँ सजग सचेत।
हृदय है क्या अच्छा हिण्डोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।

तेरी पृथ्वी की प्रदक्षिणा
देख रहे रवि सोम,
वह अचला है करे भले ही
गर्जन तर्जन व्योम।
न भय से, लीला से हूँ लोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।

ऊबेगा जब तक तरा जा
देख देख यह खेल,
हो जावेगा तब तक मेरी
भुक्ति-मुक्ति का मेल।
मिलेंगे हाँ, भूगोल-खगोल,
सखे, मेरे बन्धन मत खोल।।

रमा है सबमें राम / मैथिलीशरण गुप्त



रमा है सबमें राम,
वही सलोना श्याम।

जितने अधिक रहें अच्छा है
अपने छोटे छन्द,
अतुलित जो है उधर अलौकिक
उसका वह आनन्द
लूट लो, न लो विराम;
रमा है सबमें राम।

अपनी स्वर-विभिन्नता का है
क्या ही रम्य रहस्य;
बढ़े राग-रञ्जकता उसकी
पाकर सामञ्जस्य।
गूँजने दो भवधान,
रमा है सबमें राम।

बढ़े विचित्र वर्ण वे अपने 
गढ़ें स्वतन्त्र चरित्र;
बने एक उन सबसे उसकी
सुन्दरता का चित्र।
रहे जो लोक ललाम,
रमा है सबमें राम।

अयुत दलों से युक्त क्यों न हों
निज मानस के फूल;
उन्हें बिखरना वहाँ जहाँ है
उस प्रिय की पद-धूल।
मिले बहुविधि विश्राम,
रमा है सबमें राम।
अपनी अगणित धाराओं के
अगणित हों विस्तार;
उसके सागर का भी तो है
बढ़ो बस आठों याम,
रमा है सबमें राम।

हुआ एक होकर अनेक वह
हम अनेक से एक,
वह हम बना और हम वह यों
अहा ! अपूर्व विवेक।
भेद का रहे न नाम,
रमा है सबमें राम।

बाल-बोध / मैथिलीशरण गुप्त




वह बाल बोध था मेरा 
निराकार निर्लेप भाव में
भान हुआ जब तेरा।
तेरी मधुर मूर्ति, मृदु ममता,
रहती नहीं कहीं निज समता,
करुण कटाक्षों की वह क्षमता,
फिर जिधर भव फेरा;
अरे सूक्ष्म, तुझमें विराट ने
डाल दिया है डेरा।
वह बाल-बोध था मेरा ।।

पहले एक अजन्मा जाना,
फिर बहु रूपों में पहचाना,
वे अवतार चरित नव नाना,
चित्त हुआ चिर चेरा;
निर्गुण, तू तो निखिल गुणों का
निकला वास - बसेरा।
वह बाल-बोध था मेरा।

डरता था मैं तुझसे स्वामी,
किन्तु सखा था तू सहगामी,
मैं भी हूँ अब क्रीड़ा-कामी,
मिटने लगा अँधेरा;
दूर समझता था मैं तुझको
तू समीप हँस-हेरा।
वह बाल-बोध था मेरा।

अब भी एक प्रश्न था--कोऽहं ?
कहूँ कहूँ जब तक दासोऽहं
तन्मयता बोल उठी सोऽहं !
बस हो गया सवेरा;
दिनमणि के ऊपर उसकी ही
किरणों का है घेरा
वह बाल-बोध था मेरा।।

नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त


नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को ।

संभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को ।

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को ।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को ।........मैथिलीशरण गुप्त 

Sunday, April 10, 2011

Agnipath


वृक्ष हो भले खड़े,
हो घने, हो बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.

तू न थकेगा कभी,
तू न थमेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रू, स्वेद, रक्त से,
लथपथ, लथपथ,लथपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.



KAASH


काश
काश यह दिल शीशे का बना होता,
चोट लगती तो बेशक यह फनाह होता,
पर सुनते जब वो आवाज़ इसके टूटने की,
तब उन्हें भी अपने गुनाह का एहसास होता.

Kash
Kash Ye Dil Shishe ka bana hota,
Chot Lagti to Beshak ye Fanah hota. .
Par Sunte Jab Wo Aawaz iske Tutne ki,
Tab Unhe bhi Apne Gunah ka Ehsaas hota...
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

वो मेरे लिए कुछ ख़ास है यारों,
जिनके लौट आने की न कोई आस है यारों,
वो नज़रों से दूर है तो क्या हुआ,
बन के दिल की धड़कन वो मेरे बहुत पास तो है यारों.

Wo mere liye kuch khaas hai yaaron,
Jinke laut aane ki na koi aas hai yaaron,
Wo najron se door hai to kya hua,
Banke dil ki dhadkan wo mere bahut paas to hai yaaron.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

दीदार करने की
नज़र की चाहत है दीदार करने की,
दिल की चाहत है प्यार करने की,
मगर हालात कुछ ऐसे बन गए हैं,
ज़रुरत हो गयी है इंतज़ार करने की,
कब तलक गुज़रे हुए को देखा करें,
अब ज़रुरत है नयी राह तैयार करने की.

Deedar Karne ki
Nazar ki chahat hai deedar karne ki,
dil ki chahat hai pyar karne ki,
magar halaat kuch aise ban gaye hain,
zaroorat ho gayee hai intezaar karne ki,
kab talak guzre huye ko dekha karen,
ab zaroorat hai nai raah taiyyar karne ki.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

DIL-E JAZBAT


दिल-ए-जज़्बात

दर्द-ए-दिल की किताब खोले बैठे हैं,

अब तो हम मुस्कुराना भी छोड़ बैठे हैं,

जब भी करते हैं आँखें बंद तेरा चेहरा ही नज़र आता है,

इस कारण हम तो आँखें झपकाना भी छोड़ बैठे हैं.

जब भी लेते हैं सांस तेरी खुशबू सांसों में समां जाती है,

तू याद न आये इस लिए सांस लेना भी भूले बैठे हैं,

पर हाय री किस्मत,

क्या करें इस दिल का जिस में तुम रेहती हो,

लोग मेरे संग तुझे न जला दें इस लिए इस दिल को धडकाना नहीं भूले हैं

DIL-E JAZBAT

DARD-E-DIL KI KITAB KHOLE BAITHE HAIN,

AB TO HUM MUSKURANA BHI CHHOD BAITHE HAIN,

JAB BHI KARTE HAI AANKHEN BAND TERA CHEHRA HI NAJAR AATA HAIN,

IS KARAN HUM TO AANKHEIN JHAPKANA BHI CHHOD BAITHE HAIN,

JAB BHI LETE HAIN SAANS TERI KHUSHBU SAANSON MEIN SAMA JATI HAIN,

TU YAAD NA AAYE IS LIYE SAANS LENA BHI BHOOLE BAITHE HAIN,

PAR HAYE RE KISMAT,

KYA KAREIN IS DIL KA, JIS MEIN TUM REHTI HO,

LOG MERE SANG TUJHE NA JALA DEIN IS LIYE IS DIL KO DHADKANA NAHIN BHOOLEIN HAIN

Kismat


किस्मत से अपनी सब को शिकायत क्यूँ होती है?
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यूँ होती है?
कितने कांटे हैं राहों में फिर भी,
दिल को उसी के आने की आहट क्यूँ होती है?

Kismat se apni sabko shikayat kyu hoti hai?
Jo Nahi Mil Sakta Usise Mohobbat Kyun Hoti Hai?
Kitne kante hai raho mein phir bhi
Dil ko Usi Ke aane ki aahat kyun hoti hai...
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

अब सुकून है तो उसे भूलने में है,
लेकिन उस शख्श को भुलाये कौन,
आज फिर दिल है कुछ उदास उदास,
देखिये आज फिर याद आये कौन.

Ab sukoon hai toh use bhulne mein hai,
Lekin us shakhsh ko bhulaye kaun,
Aaj phir dil hai kuch udaas udaas
Dekhiye aaj phir yaad aaye kaun?
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
यह मेरी तलाश का जुर्म है,
या मेरी वफ़ा का कसूर है,
जो दिल के जितनी करीब है,
वो नज़र से उतना ही दूर है

Yeh meri talaash ka jurm hai,
Ya meri wafa ka kasoor hai,
Jo dil ke jitney karib hai,
Woh nazar se utna hi door hai..
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दो कदम तो सब चलते हैं,
पर ज़िन्दगी भर साथ कोई नहीं निभाता,
अगर रो कर भुलाई जाती यादें,
तो हंस कर ग़म कोई नहीं छुपाता.

Do kadam to sab chalte hai
Par zindagi bhar saath koi nahin nibhata..
Agar ro kar bhulai jati yaadein,
To hans kar gham koi nahin chhupata..
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~


Bahut udas hai koi


बहुत उदास है कोई,
बहुत उदास है कोई तेरे जाने से,
हो सके तो लौट आ किसी बहाने से,
तू लाख खफा सही मगर एक बार तो देख,
कोई टूट गया है तेरे रूठ जाने से.

Bahut udas hai koi
Bahut udas hai koi tere Jane se.
Ho sake to laut aa kisi bahane se.
Tu lakh khafa sahi magar ek baar to dekh ,
Koi toot gaya hai tere rooth jaane se...
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
खुदा ने मुझ से कहा .....इश्क न कर तू दीवाना हो जायेगा !
मैंने कहा ऐ खुदा .....तू मेरे महबूब से तो मिल ......
तुझे भी इश्क हो जायेगा

Khuda NE mujhse kaha... Ishq na kar TU diwana ho jayega!
Maine kaha aiye khuda... Tu mere mehboob se to mil..
Tujhe bhi ishq ho jayega!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
हमारे ज़ख्मों की वजह भी वो हैं,
हमारे ज़ख्मों की दवा भी वो हैं,
वो नमक ज़ख्मों पे लगाये भी तो क्या हुआ,
मोहब्बत करने की वजह भी वो हैं.

Hamare zakhmo ki wajah bhi wo hai,
Hamare zakhmo ki dava bhi wo hai,
Wo namak zakhmo pe lagaye bhi to kya hua,
Mohabbat karne ki wajah bhi wo hai,
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कुछ बीते हुए लम्हों से मुलाक़ात हुई,
कुछ टूटे हुए सपनों से बात हुई,
याद जो करने बैठे उन तमाम यादों को,
तो आप की ही यादों से शुरुआत हुई.

Kuchh beete hue lamho se mulakat hui
Kuchh tute hue sapno se baat hui
Yaad Jo karne baithe un tamam yado ko
To aap ki hi yaadon se shuruat hui
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
वो यारों की महफ़िल वो मुस्कुराते पल,
दिल से जुदा है अपना बीता हुआ कल,
कभी ज़िन्दगी गुज़रती थी वक़्त बिताने में,
आज वक़्त गुज़र जाता है चंद कागज़ के नोट कमाने में.

Wo yaron ki mehfil, woh muskurate pal,
Dil se juda hai apna bita hua Kal,
Kabhi zindagi guzarti thi Waqt bitane mein,
Aaj waqt guzar jata hai chand kagaj ke note kamane me..
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

Waqt Nahin


वक्त नही.....

हर खुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हँसी के लिए वक्त नही.
दिन रात दौड़ती दुनिया में,
जिंदगी के लिए ही वक्त नही.


माँ की लोरी का एहसास तो है,
पर माँ को माँ कहने का वक्त नही.
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक्त नही.


सारे नाम मोबाइल में हैं,
पर दोस्ती के लए वक्त नही.
गैरों की क्या बात करें,
जब अपनों के लिए ही वक्त नही.


आंखों में है नींद बड़ी,
पर सोने का वक्त नही.
दिल है ग़मों से भरा हुआ,
पर रोने का भी वक्त नही.


पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
की थकने का भी वक्त नही.
पराये एहसासों की क्या कद्र करें,
जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नही.


तू ही बता ऐ जिंदगी,
इस जिंदगी का क्या होगा,
की हर पल मरने वालों को,
जीने के लिए भी वक्त नही.......

Thursday, March 17, 2011

Purva Chalne Ke Batohi Baat Ki Pehchaan Kar Le


पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी

अनगिनत राही गए इस राह से उनका पता क्या पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी

यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है खोल इसका अर्थ पंथी पंथ का अनुमान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

यह बुरा है या कि अच्छा व्यर्थ दिन इस पर बिताना अब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना

तू इसे अच्छा समझ यात्रा सरल इससे बनेगी सोच मत केवल तुझे ही यह पड़ा मन में बिठाना

हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है तू इसी पर आज अपने चित्त का अवधान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

है अनिश्चित किस जगह पर सरित गिरि गह्वर मिलेंगे है अनिश्चित किस जगह पर बाग वन सुंदर मिलेंगे

किस जगह यात्रा खतम हो जाएगी यह भी अनिश्चित है अनिश्चित कब सुमन कब कंटकों के शर मिलेंगे

कौन सहसा छू जाएँगे मिलेंगे कौन सहसा आ पड़े कुछ भी रुकेगा तू न ऐसी आन कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

A Great Poem by Dr. Harivansh Rai ji Bachchan

Wednesday, January 7, 2009

roshni

हमको बताया था उन्होंने
हमको बताया था उन्होंने एक बार
की उनको सिर्फ़ उजाले ही भाते हैं
कहीं वो डर जायें अंधेरे में
इस लिए रौशनी के लिए हम दिल जलाते हैं
-------------------------------------------------------

तेरी उल्फत को
तेरी उल्फत को कभी नाकाम होने नही देंगे
तेरी चाहत को कभी बदनाम होने नही देंगे
मेरी जिंदगी में कभी सूरज निकले या निकले
पर तेरी जिंदगी में कभी शाम होने नही देंगे

-------------------------------------------------------
लबो पे आज
लबो पे आज उनका नाम गया,
प्यासे के हाथ में जैसे जाम गया,
डोले कदम तो गिरा उनकी बाहों में जाकर,
आज हमारा पीना ही हमारे काम गया
-------------------------------------------------------
हम होते
हम होते तो आप को ग़ज़ल कौन कहता,
आप के चेहरे को गुलाब कौन कहता,
ये तो करिश्मा है हम प्यार करने वालों का
वरना पत्थरों को ताज महल कौन कहता.

-------------------------------------------------------
तुम खफा
तुम खफा हो गए तो कोई खुशी रहेगी,
तेरे बिना चिरागों में रौशनी रहेगी;
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर,
जिंदा तो रहेंगे पर जिंदगी रहेगी.

-------------------------------------------------------
बड़ी आसानी से
बड़ी आसानी से दिल लगाये जाते हैं
पर बड़ी मुश्किल से वादे निभाए जाते हैं
ले जाती है मोहब्बत उन राहो पर
जहा दिए नही दिल जलाए जाते हैं
-------------------------------------------------------
सभी को
सभी को सब कुछ नही मिलता,
नदी की हर लहर को साहिल नही मिलता,
यह दिल वालों की दुनिया है दोस्त,
किसी से दिल नही मिलता तो कोई दिल से नही मिलता.
-------------------------------------------------------
दर्द
भुला कर हमें वो खुश रह पाएंगे?
साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे
दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द देना,
हम तो सह गए पर वोह टूट जायेंगे !
------------------------------------------------------
प्यार
जब एक एक फूल को उड़ा ले गई हवा,
उस दिन बहार को मेरे घर का पता चला.
जब उठा ले चले हमें चार लोग,
उस दिन मेरे यार को मेरे प्यार का पता चला
-------------------------------------------------------
साए की तरह
साए की तरह साथ रहने वाले
हमसे रिश्ता तोड़ गए,
हकीकत में मिलना मुमकिन नही था
तो ख्वाबों में भी आना छोड़ गए
-------------------------------------------------------
पत्थर दिल
समंदर किनारे रेत पे नाम लिखते नही,
क्यों की रेत पे नाम कभी टिकते नही,
हमे भले ही आप पत्थर दिल समझो,
मगर पत्थर पे लिखे नाम कभी मिटते नही .
-------------------------------------------------------
बरसात
आशिक आँखों ही आँखों में बात समझ लेते हैं ,
सपनो में मिलने को मुलाकात समझ लेते हैं ,
रोता हैं अस्मा भी ज़मीन के लिए ,
पागल हैं लोग उसे बरसात समझ लेते हैं.
-------------------------------------------------------

आज हम है,
आज हम है, कल हमारी यादें होंगी,
जब हम होंगे, तब हमारी बातें होंगी,
कभी पलटोगे जिंदगी के येः पन्ने,
तो शायद आप की आंखों से बरसाते होंगी
-------------------------------------------------------